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Friday, December 9, 2011

गैर जरूरी बातों के पीछे अपनी जिम्मेदारी भूलता अखबार


आज भी अखबार देख कर निराशा ही हुई ...

हिंदी दैनिक भास्कर के मुख्य पन्ने पर मात्र सहवाग की चर्चे थे... तेस्सरे पन्ने पर जिसे की मुख्य बताने की को कोशिश की गई थी उसमे भी लगभग ८०% हिस्सा विज्ञापन और सहवाग की गाथा से भरा हुआ था बचे हुए हिस्से में चार ख़बरों को रखा गया है जिनके लिए शायद पूरा पन्ना दिया जाना चाहिए था ...

प्रधानमंत्री को दायरे में लाने पर मतभेद लगभग १०० शब्दों में खबर बाकी किसी बाद वाले पेज पर (४-५ शब्द की एक लाइन.. ऐसी २०  लाइन ..इस खबर को विज्ञापनों के बीच में ढूंसा गया है )

चिदम्बरम के खिलाफ १७ को गवाही देंगे स्वामी लगभग ९० शब्दों में खबर  बाकी किसी बाद वाले पेज पर (औसतन ७ शब्द एक लाइन में ऐसी १२ लाइन बीच में एक छोटा फोटो भी. खबर उपरी कोने में बाएँ तरफ )

एफडीआई पर अड़ते तो चली जाती सरकार (प्रणब मुखर्जी का बयान. चिदम्बरम के खिलाफ गवाही वाली खबर के नीचे लगभग उसी तरह की )
कृष्णा के खिलाफ एफ आई आर लगभग ५० शब्दों में पूरी खबर ही खत्म

जब देश ऐसे माहौल में है जिसमे अखबारों को सच को डंका पीट कर लिखने की जरूरत है तब भी अगर अखबार इस तरह से लिखेंगे तो क्या वो देश के लिए अच्छा है


मुझे सहवाग के शतक़ के महिमामंडन से कोई शिकायत नहीं है लेकिन अखबारों की उदासीनता से शिकायत जरूर है

आप अपनी राय दें.

Friday, July 8, 2011

नेता जी को गालियाँ

पिछले कुछ दिनों से काफी कुछ पढ़ रहा हूँ

कांग्रेस के खिलाफ जनता में रोष है, अब इस सरकार को बदलने का वक्त आ गया है (व्यक्तिगत रूप से मै भी चाहता हूँ )चलिए यहाँ तक बात ठीक है लेकिन समस्या ये है की आपके पास आज कोई विकल्प ही कहाँ है

सब कहते हैं इस बार सरकार दूसरी बनेगी, अरे भाई ये बात तो पिछली बार भी कही थी २ साल पहले तब क्या हुआ था, तब सब कहाँ सोये हुए थे अब ऐसे कैसे अचानक शीत निद्रा से जाग गए. चलिए अच्छा है जाग गए और ये भी तय रहा की अब कांग्रेस की सरकार नहीं बनेगी तो पहले तो ये बताइये की अभी भी कौन सा कांग्रेस की सरकार है अभी भी तो खिचड़ी ही सरकार है जिसमे कुछ लोग DMK के हैं तो कुछ तृणमूल के तो कुछ कही से और कुछ कही से

चलिए मान लेते हैं आप सही है UPA ही गलत है तो सही कौन है ये बताइये और UPA नहीं तो कौन क्या NDA

उसमे कौन सा सब दूध के धुले हैं कुछ कट्टर भाजपाई नरेंद्र मोदी जी को आगे करेंगे बात सही भी लगती है वो कद्दावर नेता हैं, लेकिन समस्या यही है की वो भी १३ दल मिलाकर जब सरकार बनाएंगे तो क्या ताकत दिखा पाएंगे और BJP के पास पूर्ण बहुमत आने जैसे हालात तो नहीं है अभी राज्य सभा में पाता चल ही गया है

और जब बात चलती है नेताओं की तो सब एक सिरे से सारे नेताओं को चोर बना बैठते हैं, उम्मीद है ही नहीं की कोई नेता कुछ करेगा (मुझे भी नहीं है) पर जाने क्यों कही ना कही कुछ दबा बैठा है की अच्छा होगा लेकिन उसके लिए अच्छा नेता कहा से लाऊं अत: इन्ही में से किसी को अच्छा मानना पड़ेगा.

वैसे एक अजीब बात और भी है हम सारे नेताओं को चोर कहते हैं लेकिन आज तक मुझे नहीं लगता की कोई भी ईमानदार इंसान संसद में पहुंचा होगा पिछले २० सालो में तो गलती तो हमारी ही है ना हम चोर है तो नेता भी चोर.

मुझे नहीं पता की मै क्या ऊटपटांग लिख रहा हूँ लेकिन सिर्फ ये जानता हूँ की अगर आप बदलाव नहीं कर सकते तो किसी भी नेता को गाली देने का हक भी नहीं रखते हैं

आप किसी भी स्तर पर बदलाव करिये, चाहे उस बदलाव से कुछ फर्क ना दिख रहा हों लेकिन अगर आप ने कुछ करा है तभी नेताओं को चोर कहने की हिम्मत करिये अन्यथा नहीं

कोई इसके लिए दिमाग ना लगाए, मैंने लिखने में नहीं लगाया आप पढ़ने में क्यों लगाओ

और  एक बात सभी को कह दूं की ना मै किसी नेता को व्यक्तिगत रूप से जानता हूँ ना ही किसी पार्टी का भक्त हूँ लेकिन ये सवाल हमेशा ही उद्वेलित करता था अत: आज लिख दिया

Wednesday, June 22, 2011

लोकपाल और प्रधानमंत्री


भारत सरकार के अनुसार प्रधानमंत्री पद कभी भी लोकपाल के दायरे में नहीं आएगा, यदि हम भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री जी की बात करे तो वो बिलकुल भी भ्रस्टाचारी नहीं है अलबत्ता भ्रष्टाचारियों के पोषक जरूर है और मेरा मानना है की ये वर्तमान कांग्रेस सरकार की सोची समझी चाल है जिसका फायदा आज तो नहीं पर आज से १ साल बाद जब श्री राहुल गांधी जी प्रधानमंत्री पद ग्रहण करेंगे तब उन्हें सीधे तौर पर मिलेगा क्यूँ की अगर आज मै ये कह रहा हूँ की वर्तमान प्रधानमंत्री भ्रष्टाचारी नहीं है तो यही बात राहुल गांधी जी के लिए मै नहीं कह पाऊंगा.

इसी घोषणा के साथ एक बात ये भी तय हो गई है की प्रधानमंत्री जी के पास इस बात का अधिकार बना ही रहेगा की वो किसी को भी निर्दोष साबित कर सके या फिर अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए उस जांच का पूरा रुख मोड सके.

यहाँ बात करे श्री दिग्विजय सिह जी के बारे में की उनका जो चीखना चिल्लाना था की सर्वदलीय बैठक में सर्वदलीय सहमती के हिसाब से ये तय किया जा सकता है की प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में रखा जाना चाहिए या नहीं तो, वो एक ऐसे मंझे हुए नेता है जो अच्छी तरह से जानते हैं की ये मुमकिन ही नहीं है की किसी भी दल का नेता प्रधानमंत्री पद को लोकपाल में शामिल करना चाहेगा, क्यूँ की हर दल का नेता प्रधानमंत्री बनने के सपने पाल कर बैठा होता है, चाहे वो नेता किसी भी टटपुंजिया क्षेत्रीय दल का नेता क्यूँ ना हो तो सर्वदलीय बैठक में ये होना तो सम्भव था ही नहीं.

मैंने २ महीने पहले पहले एक व्यंग्य कविता में लिखा था
नेता जी बोले क्या जनता के प्रतिनिधि
जनता के भोलेपन से अलग होंगे

जब हमने  ६४ साल
भोली जनता को मूर्ख बनाया
तो भला अब क्यों हम रियायत दिखायेंगे

फिर वो बोले इस बिल को
हम खरगोश के बिल की तरह बनायेंगे
जीसके कारण कभी भी हम भ्रष्टाचारी
इमानदारी के साँप की पकड में नहीं आएंगे

वही बात यहाँ सही साबित हुई है 

यही महानुभाव ये भी कहते हुए पाए गए हैं की अन्ना जनता का प्रतिनिधित्व कैसे कर सकते हैं जब की वो चुने हुए नेता नहीं है, लेकिन जाने क्यों ये व्यक्ति भूल जाते हैं की जिसे देश के करोडो युवाओ ने भूखा रह कर सहयोग किया और जिनके कारण सरकार की हवा मात्र ४ दिन में ही पूरी तरह से शंट हो गई थी तो वो जनता के साथ के कारण ही हुआ था और इस लिए अन्ना जनता के चुने नेता है.

स्वयम्भू नेता तो वो है जो पीढ़ियों से गाँधी और नेहरु के नाम का उपयोग करते हुए देश के सर्वोच्च पदों पर आसीन हो जाते है, तथा वो भी जनता के नेता नहीं है जो की जी हुजूर कर के पिछले कई सालो से देश के सर्वोच्च पद पर आसीन है.पर बस अब और नहीं, अब और नहीं चलेगी ये परिवार वाद की आंधी

मैंने मेरी कविता में ये भी लिखा था की
आप आपका मुगालता पालिए
हम हमारा मुगालता पालेंगे
जो हम सफल हुए तो
भ्रष्टाचारीयों पर कई सोंटे बरसाएंगे

और जो आप हुए सफल तो
हम हार नहीं मांनंगे और उसी सोंटे पर
इंकलाबी झंडा लगा कर
फिर से दिल्ली कूंच कर जायेंगे

और फिर भूख हड़ताल करेंगे
और फिर सरकार को हमारे सामने झुकायेंगे
लेकिन ये तय है
की अब जो आगे बढ़ चुके हैं कदम
तो उन्हें पीछे नहीं हटाएंगे,
या तो जियेंगे शान से
या इन्कलाब के इस तूफ़ान में
अपनी ताकत देते हुए मिट जायेंगे
पर अब हम एक अच्छा भारत बनायेंगे

और अब इस अच्छे भारत के लिए हम सब अपने तन मन को समर्पित कर देंगे लेकिन देश को इस गड्ढे से निकल कर लायेंगे..

मै १७ अगस्त को अन्ना का साथ दूंगा...उम्मीद है आप भी साथ ही होंगे

 
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